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Aaj Ka Ravan By Ved Prakash Sharma

by Pankaj Singh  |  in Ved Prakash Sharma at  11:48:00
Aaj Ka Ravan

ऐसे ऐसे जुल्म किये थे उसने की विजय विकास ने जब सुना तो एक ही कसम खाए । यह कि वे आज के रावण को किसी हालत में जिन्दा नहीं छोड़ेंगे लेकिन जब वो शख्स सामने आया तो दोनों के होश फाख्ता हो गए क्यूंकि वो, वो था जिसकी वो पूजा करते थे । क्या वे उस शख्स को उसके किये की सजा दे सके ?






Shradhanjali

by Pankaj Singh  |  at  12:46:00
Ved Prakash Sharma (10 June 1955-17-02-2017)

Nahi Rahe Ved Prakash Sharma Ji :(

Dosto, Bahut dukh ke sath suchit karna pad raha hai ki Novel ki Duniya ke Betaaj Badshah Ved Prakash Sharma Ji ab hamare bich nahi rahe. Friday (17/02/2017) Night ko unhone apni aakhiri Saans li. Vo pichle kuch mahine se bimar chal rahe they. 

Unke Novel Wo Sala Khaddar Wala, Qaidi No 100, Vardi Wala Gunda ne Bharat me Novel Sell ka record tod diya tha. Unka likha Famous Character Vijay-Vikas mere favorite Secret Agent rahe hai. 

Aaj Merrut me unka Antim Sanskar kiya jayega. Bhagwan unki Aatma ko Shanti de or unke Pariwar walo ko ye dukh sahne ki kshamta pradan kare.

Rest In Peace 

Shaatir Khooni by Ashwin Kumar

by Pankaj Singh  |  in Shaatir Khooni at  12:00:00
Shaatir Khooni

शराफ़त के मुखौटे मे छिपा एक रहस्यमयी और बेहद ख़तरनाक हस्ती, जिसके चेहरे पर से मुखौटे उतरने पर आपके रोंगटे खड़े हो जाएगे. क्या खूने अपने मक़सद मी कामयाब हो पाएगा? क्या उसके बुरे हुए हाल मे सब उलझ कर रह जाएँगे..?

Mere Bachche Mera Ghar by Ved Prakash Sharma

by Pankaj Singh  |  in Ved Prakash Sharma at  13:34:00
Mere Bachche Mera Ghar

विजय क सामने अपने पिता यानि ठाकुर निर्भयसिंघ का ऐसा रूप आया जिसके सामने आने पर विजय की रगो मे दौड़ता खून मनो जम गया । वह सोच भी नहीं सकता था कि ठाकुर साहब अपने स्वार्थ क लिए मासूम लोगो का कत्ल तक कर सकते है ।



Chakravyuh by Ved Prakash Sharma

by Pankaj Singh  |  in Ved Prakash Sharma at  14:00:00


चक्रव्यूह, वेद प्रकाश शर्मा... ‘चक्रव्यूह’ उपन्यास नहीं बल्कि आपके लिए सचमुच का ‘चक्रव्यूह’ है। आप इस ‘चक्रव्यूह’ को तोड़ नहीं पाएंगे अर्थात् रहस्य खुलने से पहले मुजरिम का नाम नहीं जान पाएंगे आप। कृपया इस उपन्यास के ‘अंत’ के बारे में किसी को कुछ न बताएं।

Babusa Aur Somath by Anil Mohan

by Pankaj Singh  |  in Babusa aur Somath at  09:00:00


धरा का बबूसा से कहना था कि हकीकत में देवराज चौहान रानी ताशा का दीवाना नहीं है! वो कभी भी उसका दीवाना ना होता! उसके लिए ऐसा करना इसलिए जरुरी हो गया था कि उसे हर हाल में सुदूर ग्रह पर पहुंचना था और यह तभी हो सकता था जब देवराज चौहान और ताशा के संबंध मधुर रहें, परंतु अब सदूर की जमीन पर पांव रखते ही उसकी ताकतें देवराज चौहान के सिर से हट जाएगी और देवराज चौहान रानी ताशा का हाथ छोड़ कर नगीना का हाथ थाम लेगा!

Apne Katla ki Supari by Ved Prakash Sharma

by Pankaj Singh  |  in Ved Prakash Sharma at  14:04:00


वो हालात की भंवर मे फँसा एक मासूम इंसान था. जिसे जिंदगी की चाहत से ज़्यादा अपनो की फ़िक्र थी और जब अपनो पर आने वाली मुसीबत की उसने कल्पना की तो उसे उन्हे बचाने की सिर्फ़ एक ही राह नज़र आई और उसने दे दी .... अपने कत्ल की सुपारी

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